कबीर दास जयंती पर विशेष: आज भी प्रासंगिक हैं कबीर
  • 28 Jun 2018 07:58:49 GMT

कबीर दास जयंती पर कबीरपंथ प्रमुख व कबीरचौरा मठ मूलगादी वाराणसी के आचार्य संत विवेक दास से जानें आज भी कितने प्रासंगिक हैं कबीर।



सिर्फ आसन, प्राणायाम, ध्यान ही योग नहीं है: श्री श्री रविशंकर
  • 21 Jun 2018 05:39:20 GMT

श्री श्री रविशंकर का चिंतन है सिर्फ आसन, प्राणायाम, ध्यान ही नहीं, बल्कि किसी कार्य को कुशलतापूर्वक करना या तनावरहित जीवन जीना, ये भी योग हैं।



जीवन का आनंद उसे अपने अनुभव से जीने में है: ओशो
  • 13 Jun 2018 09:49:33 GMT

आचार्य रजनीश यानि ओशो का मानना है कि हर व्यक्ति को आनंद के साथ जीना चाहिए। इस आनंद के लिए जरूरी है कि वो अपने अनुभव से सीखे।



महावीर जंयती: कौन हैं भगवान महावीर और कैसी हैं उनकी शिक्षा
  • 29 Mar 2018 05:14:17 GMT

आज भगवान महावीर की जयंती है आइये जाने कि आज की तनाव भरी जिंदगी में उनकी शिक्षा से कैसे हम अवसाद ग्रस्‍त होने से बचे रह सकते हैं।



ओशो से जानें कैसे होता है लोभ का विस्तार
  • 11 Mar 2018 04:30:00 GMT

आचार्य रजनीश उर्फ ओशो ने एक सवाल के जवाब में बताया कि कैसे लोभ का विस्‍तार होता है और उसके प्रभाव क्‍या होते हैं।



रंगों की विविधता का चादर
  • 1 Mar 2018 10:18:21 GMT

परमहंस आश्रम सक्तेशगढ मीरजापुर के पीठाधीश्‍वर स्वामी अड़गड़ानंद महाराज से जानें रंगों की विविधता का प्रभाव।



क्‍या है आत्मा की ज्योति: महर्षि याज्ञवल्क्य
  • 26 Feb 2018 04:52:27 GMT

आत्‍मा के उज्‍जवल होने के बारे में ज्ञान देते हुए महर्षि याज्ञवल्क्य बताते हैं कि जो आत्मा के बारे में जान गया, वह महाज्ञानी हो गया।



रामकृष्ण परमहंस पर विशेष: धार्मिक कर्मकांड नहीं मानव सेवा सच्ची भक्ति
  • 17 Feb 2018 04:30:00 GMT

रामकृष्ण परमहंस धार्मिक कर्मकांड की बजाय मानव सेवा को ही सच्ची ईश्वर भक्ति मानते थे। उन्‍होंने इसको कई उदाहरणों द्वारा प्रमाणित भी किया है।



गौतम बुद्ध के लिए कौन है अस्पृश्य
  • 3 Feb 2018 04:30:00 GMT

गौतम बुद्ध के विचारों में कई गूढ़ अर्थ छुपे होते थे। एक कथा के माध्‍यम से जाने बुद्ध का ऐसा ही एक ज्ञानपूर्ण सत्‍य।



संत रविदास को विश्‍वास था कि अंतर्मन की पवित्रता ही है सच्ची ईश्वर भक्ति
  • 1 Feb 2018 04:20:13 GMT

संत रविदास कहते हैं कि अंतर्मन की पवित्रता ही सच्ची ईश्वर भक्ति है। इसके लिए व्यक्ति धार्मिक कर्मकांड की बजाय विनम्र होकर निरंतर कर्म करता रहे।